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मेवाड़ यूनिवर्सिटी का ‘टेक्निकल टुडे क्लब’ स्टूडेंट्स को दे रहा नवीनतम तकनीकी का ज्ञान देश विदेश के वैज्ञानिक कर चुके है प्रोजेक्ट की प्रशंसा

चित्तौडगढ़। बेकार वस्तुओं को किस प्रकार उसका सदुपयोग किया जाए कि उससे विभिन्न तरह के प्रोजेक्ट्स या मैटीरियल बनाया जा सकें, यह गुण मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बने टेक्निकल टूडे क्लब में स्टूडेंट्स को सिखाया जाता है।

क्लब के माध्यम से स्टूडेंट्स को तकनीकी रूप से अपडेट किया जाता है ताकि वह प्रैक्टिकल रूप से भी तकनीकी को समझकर उसका बेहतर उपयोग कर सकेें। क्लब के स्टूडेंट्स ने एक से एक बढ़कर प्रोजेक्ट्स बनाए है जिनको देखने के लिए देश-विदेश से वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ क्लब में आ चुके है, जिनमें ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी, आस्ट्रेलिया से डॉ. अब्दुल सतार, डीआरडीओ से डॉ. अनिता सिंह, भारत के सुपर कंप्यूटर के फादर पदम विभूषण डॉ. विजय पी भटकर, जयंत सहस्रबुद्धे, आईआईटी दिल्ली से प्रोफेसर भुवनेश गुप्ता आदि शामिल है।


क्लब में स्टूडेंट्स को नई तकनीकी का ज्ञान देने के लिए समय-समय पर इंटरनेशनल कांफ्रेंस, क्विज कंपटीशन, सेमिनार, वर्कशॉप भी आयोजित की जाती है। इस क्लब में 10 विभिन्न देशों और 15 राज्यों के स्टूडेंट्स काम कर रहे है। क्लब के भवन को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यहां पर टाइम ट्रेवल और ब्लैक हॉल अवधारणा पर आधारित थ्योरी को समझाया गया है। क्लब में जो प्रोजक्टस रखे है उसमें वेस्ट मैटीरियल जैसे बोतल, ई-वेस्ट, चॉप स्टिक्स, टूथ पिक, कंप्यूटर सीडी आदि का भरपूर उपयोग किया गया है।


बॉक्सः
टेक्निकल टुडे क्लब में बनाए गए प्रोजेक्ट्स:
यहां यूनिवर्सिटी के पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग थर्ड ईयर के नाइजीरियन स्टूडेंट्स ताहिर इजु और जॉन डेविड मार्शल ने मोबाइल वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम तैयार किया है जो बाथरूम, किचन और लांडरी से जो वेस्ट पानी निकलता है उसको साफ कर देता है। इसी तरह से स्टूडेंट सुधांशु सोनी, नमिता गर्ग, दीपनारायण राव, राहुल कुमार और जॉन ने पोर्टेबल सोलर प्लांट बनाया है। इस प्लांट की खासियत कि इसे कहीं भी उठाकर ले जाया जा सकता है। इस प्लांट में चार्जिंग किट के साथ कूलिंग सिस्टम भी लगा है। इसे रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर आसानी से रखा जा सकता है वहीं छोटे होटलों, गांव और कस्बों में भी इसका सदुपयोग हो सकता है। इसके अलावा क्लब में इकोफ्रेंडली मंड हाउस बनाया गया है जो बहुत किफायती है ओर इसमें वेस्ट प्लास्टिक बोतलों और मड का उपयोग किया गया है। इसकी खासियत यह पूरी तरह से हीट प्रूफ है। इसके अलावा न्यूमेटिक कार का मॉडल रखा है। इसकी खासियत है कि इसमें कम्प्रैस्ड एयर को प्रेशर के जरिए गाडी में फ्यूल देने का कार्य होता है। यह एक तरह से यह ईकोपफ्रेंडली है और इसमें कार्बन का उत्सर्जन न के बराबर होता है। वहीं क्लब में स्मार्ट मीटर, पासर्वड आधारित स्विच, आब्सटेकल अवाइडर रोबोट, रेन वॉटर हारवेस्टिंग जैसे स्टूडेंट्स द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट्स भी तकनीकी गुर बता रहे है।

टैक्निकल टुडे क्लब के स्टूडेंट्स की आगामी प्लानिंग है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित रोबोट के साथ घर और ऑफिस को संजाने वाले रोबोट बनाए जाएंगे। साथ ही सेंसर से खुलने वाली एआई आधारित डस्टबिन को बनाए जाने की योजना है।
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क्लब के इंचार्ज और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर लोन फैजल ने बताया कि टेक्निकल टूडे क्लब की स्थापना 5 मार्च 2016 में की गई थी। तब से यहां पर निरंतर भविष्य को देखते हुए आधुनिक तकनीकी से लैस प्रोजेक्ट्स बनाए जा रहे है। क्लब में अन्य यूनिवर्सिटीज और स्कूल के बच्चों को भी बुलाकर नवीनतम तकनीकी का ज्ञान दिया जाता है ताकि वे विज्ञान की ओर आकर्षित हो सकें।

RISHABH JAIN
Author: RISHABH JAIN

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