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जन्म जन्मांतर के अशुभ कर्मों से पल भर में भक्ति के माध्यम से मुक्ति मिल सकती-कमल मुनि

नीमच। श्रद्धा भाव और भक्ति से युक्त उठने वाली मन मंदिर में वाइब्रेशन आत्मा को निर्मल और पवित्र बना देती है। उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने नीमच जिला जेल में श्रीमद् भागवत कथा उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कही।


उन्होंने कहा कि भक्ति रामबाण औषधि है जो मानव को मानसिक तनाव ब्लड प्रेशर डिप्रेशन हार्ट अटैक शुगर रोगों को नियंत्रण करने में सहयोगी बनती है। मुनि कमलेश ने बताया जन्म जन्मांतर के अशुभ कर्मों से पल भर में भक्ति के माध्यम से मुक्ति मिल सकती है।
राष्ट्रसंत ने कहा कि निष्काम और निस्वार्थ होकर समर्पण के भाव से की गई भक्ति पशु को भी पूजनीय बना देती है। जैन संत ने कहा कि विज्ञान ने भी सिद्ध कर दिया है भक्ति का प्रभाव इंसान तो क्या पशु पक्षी और संपूर्ण प्रकृति पर पड़ता है।
भागवत कथा वाचक पंडित घासी लाल जी ने कहा कि गुरुदेव के आशीर्वाद के बिना कोई भी साधना सफल नहीं होती, मुझे राष्ट्र संत की सेवा करने का सौभाग्य मिल रहा है मेरे जैसी 15,20 पंडित दिवाकर मंच के नेतृत्व में देश के कोने कोने में भागवत कथा करके संपूर्ण पैसा गौ माता की सेवा में समर्पित करते हैं।


अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली द्वारा 5 से 12 मार्च तक जेल में भागवत कथा सप्ताह मंच के वरिष्ठ पंडित घासी लाल के द्वारा संपूर्ण की जा रही है। श्री गोपाल गुरुकमल जिला जेल नीमच के महामंत्री सत्यनारायण पाटीदार ने बताया कि 6 मार्च को प्रातः 10 गौशाला का उद्घाटन किया जाएगा। जेल शिक्षक प्रभात कुमार ने मुनि कमलेश का अभिनंदन किया।

महामंडलेश्वर सुरेशानंदजी मुख्य अतिथि के रूप में थे जिन्होंने जेल को 12 पंखे प्रदान किये। दिवाकर मंच के कार्यकर्ता महेश वीरवाल ने कथावाचक का सम्मान किया।

RISHABH JAIN
Author: RISHABH JAIN

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